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Taurus
वृष

ई ऊ ए ओ वा वी वू वे वो

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परिचय

         भचक्र की यह दूसरी राशि है। इस राशि का चिन्ह बैल है। बैल स्वाभाविक रूप से अधिक परिश्रमी और वीर्यवान होता है। साधारणतय: वह शांत रहता है, परन्तु क्रोध आने पर वह उग्र रूप धारण कर लेता है। यह स्वभाव वृष राशि के जातकों में भी पाया जाता है। वृष राशि का विस्तार राशि चक्र के 30 अंश से 60 अंश के मध्य पाया जाता है। इसका स्वामी ग्रह शुक्र है। इसके अन्तर्गत आने वाले तीन नक्षत्र क्रमशः कृतिका, रोहिणी एवं मृगशिरा हैं। इन नक्षत्रों के स्वामी क्रमशः सूर्य, चंद्र एवं मंगल हैं। इस राशि में कृतिका नक्षत्र के तीन चरण, रोहिणी नक्षत्र के चारों चरण एवं मृगशिरा नक्षत्र के केवल प्रथम दो चरण ही आते हैं। कृत्तिका नक्षत्र-चरणों के स्वामी क्रमशः शनि, चन्द्र, एवं गुरु हैं, रोहिणी नक्षत्र-चरणों के स्वामी क्रमशः मंगल, शुक्र, बुध एवं चन्द्रम हैं। मृगशिरा नक्षत्र-चरणों के स्वामी क्रमशः सूर्य एवं बुध हैं। वॄष पॄथ्वी तत्व वाली राशि और भू मध्य रेखा से 20 अंश पर मानी गई है। जब चन्द्र निरयण पद्धति से वृष राशि में हो, तो जातक की वृष राशि होती है।

राशिफल

         इस राशि में जन्म लेने वाले जातक शौकीन तबियत, सजावटी स्वभाव, जीवन साथी के साथ मिलकर कार्य करने की वॄत्ति, अपने को उच्च समाज से जोड़ कर चलने वाले, अपने नाम को दूर-दूर तक फ़ैलाने वाले, हर किसी के लिये उदार स्वभाव, भोजन के शौकीन, बहुत ही शांत प्रकॄति, मगर जब क्रोध आ जाये तो मरने-मारने के लिये तैयार, बचपन में बहुत शैतान, जवानी में कठोर परिश्रमी और बुढापे में अधिक चिंताओं से घिरे रहने वाले, जीवन साथी से वियोग के बाद दुःखी रहने वाले और अपने को एकांत में रखने वाले पाये जाते हैं। इनके जीवन में 45 वर्षों के बाद दुःखों का बोझ लद जाता है और अपने को आराम में नहीं रख पाते हैं। इस राशि वाले धनी होते चले जाते है, मगर चालाकियों के कारण यह लोग जल्दी ही बदनाम भी हो जाते हैं। गाने बजाने और अपने कंठ का प्रयोग करने के कारण इनकी आवाज अधिकतर बुलन्द होती है। अपने सहायकों से अधिक दूरी इनको बर्दास्त नहीं होती है। वृष राशि वाले जातक शांति पूर्वक रहना पसंद करते हैं, उनको जीवन में परिवर्तन से चिढ सी होती है, इस राशि के जातक अपने को बार-बार अलग माहौल में रहना अच्छा नहीं लगता है। इस प्रकार के लोग सामाजिक होते हैं और अपने से उच्च लोगों को आदर की नजर से देखते है। जो भी इनको प्रिय होते हैं उनको यह आदर खूब ही देते हैं और सत्कार करने में हमेशा आगे ही रहते है। सुखी और विलासी जीवन जीना पसंद करते हैं। इस राशि के जातको में धन कमाने की प्रवॄति और धन को जमा करने की बहुत इच्छा होती है। धन की राशि होने के कारण अक्सर ऐसे जातक खुद को ही धन के प्रयुक्त करते हैं। बुध की प्रबलता होने के कारण जमा योजनाओं में उनको विश्वास होता है। इस राशि के लोग लेखाकारी, अभिनेता, निर्माता, निर्देशक, कलाकार, सजावट कर्ता, सौन्दर्य प्रसाधन का कार्य करने वाले, प्रसाधन सामग्री के निर्माण कर्ता, आभूषण निर्माण कर्ता और आभूषण का व्यवसाय करने वाले, विलासी जीवन के साधनो को बनाकर या व्यापार करने के बाद कमाने वाले, खाद्य सामग्री के निर्माण कर्ता आदि काम मिलते हैं। नौकरी में सरकारी कर्मचारी, सेना या नौसेना में उच्च पद और चेहरे आदि तथा चेहरा सम्भालने वाले भी होते हैं। धन से धन कमाने के मामले में बहुत ही भाग्यवान माने जाते हैं। वृष राशि वालों के लिये अपने ही अन्दर डूबे रहने की और आलस की आदत के अलावा और कोई बडी बीमारी नहीं होती है। इनमें शारीरिक अक्षमता की आदत नहीं होती है। इनके अन्दर टांसिल, डिप्थीरिया, पायरिया, जैसे मुँह और गले के रोग होते हैं। जब तक इनके दांत ठीक होते हैं, यह लोग आराम से जीवन को निकालते हैं और दांत खराब होते ही इनका जीवन समाप्ति की ओर जाने लगता है। बुढापे में जलोदर और लकवा वाले रोग भी पीछे पड जाते हैं।

चरणफल

         जातकों की अधिक जानकारी हेतु यहां पर नक्षत्र चरण के अनुसार फलकथन प्रस्तुत किया जा रहा है।

   1. ई

         इस चरण में जन्मे जातकों के जीवन में पिता-पुत्र के मध्य मतभेद रहता है। जातक का मानस सरकारी कामों की तरफ़ ले जाने और सरकारी ठेकेदारी का कार्य करवाने की योग्यता देते हैं।

   2. ऊ

         इस चरण में जन्मे जातकों के पिता के पास जमीनी काम या जमीन के द्वारा जीविकोपार्जन का साधन होता है। जातक अधिक तर मंगल अशुभ हो जाने की दशा में शराब, कबाब इत्यादि में अपनी रुचि को प्रदर्शित करता है।

   3. ए

         इस चरण में जन्मे जातकों में ज्ञान के प्रति अहम भाव को पैदा करने वाला होता है। वह जब भी कोई बात करता है तो गर्व की बात करता है। सरकारी क्षेत्रों की शिक्षाये और उनके काम जातक को अपनी तरफ़ आकर्षित करते हैं और किसी प्रकार से केतु का बल मिल जाता है तो जातक सरकार का मुख्य सचेतक बनने की योग्यता रखता है।

   4. ओ

         इस चरण में जन्मे जातक के अन्दर मानसिक गर्मी अधिक होती है। कल-कारखानों, अस्पताली कामों और जनता के झगडे सुलझाने का काम जातक कर सकता है। जातक की माता आपत्तियों से घिरी होती है और पिता का लगाव अन्य स्त्रियों से बना रहता है।

   5. वा

         इस चरण में जन्मे जातक अधिक सौन्दर्य बोधी और कला प्रिय होते हैं। जातक कलाकारी के क्षेत्र में अपना नाम करता है। माता और पति का साथ या माता और पत्नी का साथ घरेलू वातावरण में सामंजस्यता लाता है। जातक या जातिका अपने जीवन साथी के अधीन रहना पसंद करता है।

   6. वी

         इस चरण में जन्मे जातक को कन्या संतान अधिक होती है और माता के साथ वैचारिक मतभेद का वातावरण बना रहता है। जातक या जातिका के जीवन में व्यापारिक यात्रायें अधिक होती हैं। जातक अपने ही बनाये हुए उसूलों पर अपना जीवन चलाता है। अपनी ही क्रियायों से वह मकडी जैसा जाल बुनाता रहता है और अपने ही बुने जाल में फ़ंस कर अपने को समाप्त भी कर लेता है।

   7. वू

         इस चरण में जन्मे जातक के अन्दर हमेशा उतार-चढाव की स्थिति बनी रहती है, वह अपने ही मन का राजा होता है।

   8. वे

         इस चरण में पैदा होने वाले जातक अपने शरीर से दुबले-पतले होने के बावजूद गुस्से की फ़ांस होते हैं। वे अपने को अपने घमंड के कारण हमेशा अन्दर ही अन्दर सुलगाते रहते हैं। उनके अन्दर आदेश देने की वॄति होने से सेना या पुलिस में अपने को निरंकुश बनाकर रखते है। इस तरह के जातक अगर राज्य में किसी भी विभाग में काम करते हैं तो सरकारी सम्पत्ति को किसी भी तरह से क्षति नहीं होने देते।

   9. वो

         इस चरण में जन्मे जातक के अन्दर कभी कठोर और कभी नर्म वाली स्थिति पैदा होती रहती है। कभी तो जातक बहुत ही नरम दिखाई देता है और कभी बहुत ही गर्म मिजाजी बन जाता है। जातक का मन कम्प्यूटर और इलेक्ट्रोनिक सामान को बनाने और इन्ही की इन्जीनियरिंग की तरफ़ सफ़लता भी देता है।

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।। हरि ॐ  हरि ॐ  हरि ॐ ।।
।। शुभ हो  शुभ हो  शुभ हो ।।
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