दैवज्ञ श्री हर्षदीप जी पंजाब प्रांत के मुक्तसर जिला में जन्मी एक श्रेष्ठ ज्योतिष विद्यार्थी हैं। आपने ज्योतिष शास्त्र के अन्तर्गत वैदिक पद्धति, लाल किताब पद्धति, टैरो कार्ड्स रीडिंग एवं वास्तु शास्त्र इत्यादि विद्याओं का ज्ञान श्रेष्ठ गुरुजनों से प्राप्त किया है। लगभग 3 वर्षों से आप ज्योतिष के द्वारा समाज एवं राष्ट्र की सेवा कर रही हैं। लाल किताब 1952 में आपकी गहरी रूचि है। लाल किताब के उपाय सदैव ही रामबाण उपाय साबित होते रहे हैं। ध्यान के क्षेत्र में भी आपकी रूचि है। आपका बचपन से ही अध्यात्म और ईश्वर में रुझान रहा है। शिव आपके आराध्य हैं। आपका ज्योतिष को आज-कल के आधुनिक वातावरण में देखने का एक पृथक दृष्टिकोण है। आपका मानना है कि स्वयं को समझना ही ज्योतिष को समझना है। ज्योतिष एक गहरा समंदर है, जिसका तल नहीं है, जिसमें जितना डूबते जाओगे उतना ही सीखने को समझने को मिलेगा। ज्योतिष एक ऐसा ज्ञान है जो कभी समाप्त नहीं हो सकता। ज्योतिष से जातक अपने जीवन की समस्याओं से निजात पा सकते हैं, दुःख को अपने से दूर कर सकते हैं, सुख की ओर बढ़ सकते हैं। अपने जीवन को एक नयी राह दे सकते हैं। अपने जीवन को, अपने परिवार को साथ ही आने वाली पीढ़ी को एक नयी उम्मीद, सुख, सोच, और समझ प्रदान कर सकते है जिससे जीवन को हंसी-ख़ुशी से चलाया जा सके। लाल किताब, वैदिक, टैरो, वास्तु शास्त्र की विद्या के द्वारा लोगों का भला करना, मार्गदर्शन करना, ईमानदारी से काम करना ही आपका लक्ष्य है। एस्ट्रोसूत्र आपसे जुड़कर गौरवान्वित महसूस करता है एवं आपके उज्जवल भविष्य की कामना करता है।

         राधे-कृष्ण।